साइबर फ्रॉड और म्यूल अकाउंट से बचें

साइबर फ्रॉड और म्यूल अकाउंट से बचाव समझते भारतीय ग्राहक का चित्र

ग्राहक जागरूकता · साइबर सुरक्षा · अंतिम समीक्षा: 29 सितंबर 2026

अनजान कॉल, लिंक, संदेश या QR कोड पर भरोसा न करें। OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, पासवर्ड या बैंक लॉगिन किसी के साथ साझा न करें। वित्तीय ठगी होने पर बैंक को तुरंत सूचित करें, 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

पैसा पाने के लिए PIN नहीं लगताQR कोड स्कैन करके UPI PIN डालना सामान्यतः भुगतान को अधिकृत करता है—पैसा प्राप्त करने को नहीं।
अपना खाता किराये पर न देंकमीशन या नौकरी के बदले अपना बैंक खाता या UPI किसी और को इस्तेमाल करने देना आपको म्यूल अकाउंट के जाल में फँसा सकता है।

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साइबर फ्रॉड क्या है?

जब अपराधी फोन, संदेश, ईमेल, सोशल मीडिया, नकली ऐप या वेबसाइट के माध्यम से भरोसा, डर या लालच पैदा करके आपका पैसा, पहचान या बैंकिंग जानकारी हासिल करते हैं, तो यह साइबर फ्रॉड है। वे बैंक, पुलिस, सरकारी अधिकारी, KYC कर्मचारी, कुरियर कंपनी, रिश्तेदार या निवेश सलाहकार बनकर संपर्क कर सकते हैं।

म्यूल अकाउंट क्या है?

म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता है जिसका उपयोग अपराध से प्राप्त धन को लेने, रोकने या आगे भेजने के लिए किया जाता है। जालसाज कमीशन, घर से काम, ऑनलाइन नौकरी, लोन, गेमिंग, ट्रेडिंग या “सिर्फ एक ट्रांजैक्शन” का लालच देकर आपका खाता, ATM कार्ड, SIM, UPI ID या मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। खाताधारक जानबूझकर या अनजाने में फँस सकता है, लेकिन खाता फ्रीज होने, पैसे के नुकसान और कानूनी कार्रवाई का जोखिम बना रहता है।

इन संकेतों को देखते ही रुक जाएँ

  • “KYC बंद हो जाएगी”, “खाता ब्लॉक होगा”, “इनाम मिला है” या “अभी भुगतान करें” जैसी जल्दबाजी।
  • अनजान लिंक खोलने, APK/app इंस्टॉल करने या स्क्रीन-शेयर/रिमोट-एक्सेस ऐप चलाने का दबाव।
  • OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, पासवर्ड, आधार/PAN की फोटो या बैंक लॉगिन माँगना।
  • पैसा प्राप्त करने के नाम पर QR कोड स्कैन कराना या UPI PIN डलवाना।
  • आपके खाते में पैसा मँगाकर दूसरे खाते में भेजने, नकद निकालने या क्रिप्टो खरीदने के बदले कमीशन देना।
  • बात गुप्त रखने, परिवार से संपर्क न करने या बैंक/पुलिस को न बताने की धमकी।

सुरक्षित रहने के सात नियम

  1. अनजान कॉल, संदेश, लिंक, फाइल, QR कोड और सोशल मीडिया ऑफर पर तुरंत कार्रवाई न करें।
  2. संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या बैंक कार्ड पर दिए नंबर से स्वयं सत्यापन करें।
  3. OTP, PIN, CVV, पासवर्ड और बैंक लॉगिन गोपनीय रखें—बैंक या सरकारी संस्था भी इन्हें नहीं माँगती।
  4. अपने नाम का बैंक खाता, UPI ID, SIM, ATM कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग किसी और के लेन-देन के लिए न दें।
  5. मोबाइल और ऐप अपडेट रखें; केवल आधिकारिक app store से ऐप लें; अज्ञात स्क्रीन-शेयर ऐप हटाएँ।
  6. लेन-देन से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और राशि पढ़ें; UPI collect request को भी जाँचकर ही स्वीकार करें।
  7. संदिग्ध गतिविधि पर बैंक को उसके आधिकारिक हेल्पलाइन से तुरंत सूचित करें।

ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?

बैंक को तुरंत सूचित करें। आधिकारिक नंबर से कॉल करके कार्ड, UPI या डिजिटल बैंकिंग सुरक्षित कराने और संदिग्ध लेन-देन दर्ज कराने को कहें।
1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, धन के आगे बढ़ने को रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है; वापसी की गारंटी नहीं होती।
cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। मोबाइल नंबर, बैंक/वॉलेट, UPI ID, राशि, दिनांक, ट्रांजैक्शन ID और लाभार्थी विवरण तैयार रखें।
सबूत सुरक्षित रखें। कॉल लॉग, संदेश, स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल/लिंक, रसीद, ईमेल और शिकायत संख्या मिटाएँ नहीं।
खातों को सुरक्षित करें। भरोसेमंद दूसरे उपकरण से प्रभावित पासवर्ड/PIN बदलें, रिमोट-एक्सेस ऐप हटाएँ और आवश्यकता पर पुलिस/साइबर सेल से संपर्क करें।

ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) के लिए जिम्मेदारी

  • जागरूकता पोस्टर ऐसी जगह लगाएँ जहाँ ग्राहक उसे स्पष्ट पढ़ सकें।
  • हर ग्राहक से उसकी सहमति लेकर सेवा दें; OTP/PIN ग्राहक स्वयं दर्ज करे।
  • ग्राहक का PIN, पासवर्ड या लॉगिन लिखकर, फोटो लेकर या अपने पास रखकर कभी संग्रह न करें।
  • संदिग्ध लेन-देन पर बैंक की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट करें।
  • पीड़ित को बैंक, 1930 और cybercrime.gov.in की सही जानकारी दें; किसी भुगतान वाले “रिकवरी एजेंट” के पास न भेजें।
Hindi cyber fraud and mule account awareness poster
ग्राहक सेवा केंद्र पर प्रदर्शन हेतु जागरूकता पोस्टर — बड़े आकार में देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पैसा पाने के लिए QR कोड स्कैन या UPI PIN डालना पड़ता है?

नहीं। QR कोड स्कैन करके UPI PIN डालना सामान्यतः आपके खाते से भुगतान को अधिकृत करता है। केवल पैसा प्राप्त करने के लिए इसकी आवश्यकता नहीं होती।

क्या मैं अपना बैंक खाता किसी परिचित को इस्तेमाल करने दे सकता हूँ?

नहीं। आपको पैसे का वास्तविक स्रोत पता नहीं हो सकता और आपका खाता धोखाधड़ी से जुड़ सकता है।

साइबर ठगी की शिकायत करते समय कौन-सी जानकारी तैयार रखें?

बैंक या वॉलेट का नाम, खाता या UPI विवरण, ट्रांजैक्शन ID, दिनांक, राशि, लाभार्थी विवरण और संबंधित स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

क्या शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की गारंटी है?

नहीं। पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती, लेकिन तुरंत रिपोर्ट करने से बैंक और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को धन का पता लगाने या रोकने का बेहतर अवसर मिलता है।

महत्वपूर्ण: यह लेख सामान्य साइबर सुरक्षा जानकारी देता है। भारत में ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर अपने बैंक से संपर्क करें, 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर बिना देर शिकायत दर्ज करें।

आधिकारिक संदर्भ